लखनऊ: जहाँ जरूरतें नहीं, केवल ठेके बनते हैं!

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लखनऊ में योजनाकारों की फिजूलखर्ची की बानगी जगह-जगह बिखरी पड़ी है। इस फेहरिस्त में एक और नया नाम इन दिनों वृंदावन कालोनी में जोड़ा जा रहा है। गोमती नगर में अंबेडकर पार्क के बगल से निकलकर गोमती किनारे शहीद पथ तक जाने वाली सड़क को ही देख लीजिए। घने पेड़ों और नदी के घुमावों के बीच बनी इस खूबसूरत सड़क पर गाड़ी चलाना किसी हिल स्टेशन पर घूमने जैसा सुखद एहसास तो देता है, लेकिन इस पर चलने वाले इक्का-दुक्का मुसाफिरों को देखकर यही समझ आता है कि यह सड़क जनता के लिए कम और सरकारी बजट खपाने के लिए ज़्यादा बनाई गई थी।

इंजीनियरिंग के ऐसे ही ‘शानदार विज़न’ का नमूना शहर के साइकिल ट्रैक हैं। गोमती नगर से विकास नगर तक फैले ये ट्रैक आज साइकिल चालकों से महरूम हैं। कहीं अचानक दीवार में खत्म हो जाने वाले ये ट्रैक अब मुख्य रूप से अवैध पार्किंग, कूड़े के ढेर और पटरी दुकानदारों के स्थायी ठिकाने के रूप में ‘सफलतापूर्वक’ अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

कमाल की बात यह भी है कि इसी शहर में एक रेलवे ओवरब्रिज सीधे लोगों के बेडरूम और बालकनियों के मुहाने पर ठिठक गया। जमीन अधिग्रहण और समन्वय की जहमत उठाए बिना बनाया गया यह ढांचा आज ‘डेड-एंड’ के रूप में खड़ा प्रशासनिक सूझबूझ पर हंस रहा है।

वहीं रिंग रोड का जाम खत्म करने के नाम पर बने खुर्रम नगर–मुंशीपुलिया फ्लाईओवर ने अपनी अनोखी बनावट से जाम को खत्म करने के बजाय केवल 500 मीटर आगे खिसका दिया है। नीचे चौराहे आज भी उसी शान से हांफ रहे हैं, बस फर्क इतना है कि अब लोग जाम में फंसने का नजारा ऊपर पुल से भी देख सकते हैं।

ऐसा लगता है शहर के योजनाकारों की नजर में जनता की सहूलियत कोई प्राथमिकता नहीं है। जब तक बिना सोचे-समझे बजट ठिकाने लगाने की यह परिपाटी जारी रहेगी, तब तक लखनऊ को असल राहत नहीं मिलेगी। लेकिन मिलेंगे बंद गलियों में खत्म होते पुल और सुनसान रास्तों पर चमकती फोर-लेन सड़कें।

1 thought on “लखनऊ: जहाँ जरूरतें नहीं, केवल ठेके बनते हैं!”

  1. Indu prakash Sharma

    बिल्कुल सही यही हाल उन मुख्य चौराहों का भी है जिधर करोड़ों रुपये खर्च कर एक लंबे समय तक निर्माण कार्यों के बाद स्थिति वैसी की वैसी है, मुख्य चौरहों पर जब तक अतिक्रमण रहेगा कुछ नहीं हो सकता जब तक रोड पर व्यापार करने वाले ई रिक्शा चालकों और उन महान इंजीनियर्स को जो कौन सा ज्ञान प्राप्त कर रोड डिज़ाइन करते हैं और उन पुलिस वालो को भी जिनसे ना अव्यवस्था फैलाने वाले डरते हैं और ना ही उनका कोई इंटरेस्ट है , एमिटी यूनिवर्सिटी वाली रोड पर रेल ओवरब्रिज बनने के बाद भी १-१ घंटा जाम लग रहा है ।

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