तौलिया, कुर्सी और पर्दे

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नेता और अधिकारी सफाई पसंद होते हैं। तभी तो दसियों हजार की चक्के वाली कुर्सी पर वे सैकड़ों की नरम सफेद तौलिया डाल कर विराजमान होते हैं और तमाम उजले-काले कारनामे करते रहते हैं। लाखों की कार की सीटों पर भी वे बिना तौलिया के अपनी काया नहीं रखते। पता नहीं सीट गंदा होने का डर होता है या खुद के गंदा होने का।

तो हुआ ऐसा कि जब अफसर से मिलने ‘माननीय’ गए तो ‘माननीय’ को मिली नंगी कुर्सी। अब माननीय तो ठहरे माननीय। बात सबसे बड़े माननीय तक पहुंची और उन्होंने फरमान जारी कर दिया कि जब माननीय किसी अफसर से मिलने जाए तो अफसर उन्हें अपने जैसी तौलिया बिछी कुर्सी पर बिठाकर उनकी बात सुनें। अब अफसर तो मेज के एक ओर बड़ी कुर्सी पर बैठता है और दूसरी ओर उसकी हैसियत के हिसाब से दो चार या दस बीस मामूली कुर्सी लगी होती हैं। इन मामूली कुर्सियों में एक तौलिया लगी अफसर जैसी कुर्सी कैसे आएगी यह दिलचस्प होगा।

कुर्सी पर बैठा अफसर भाग्य विधाता होता है। बिरतानिया राज में फरियादी को अफसर के सामने खड़ा रहना होता था। कुछ एक किस्मत वाले लोगों को ‘कुर्सी नशीन’ सर्टिफिकेट मिला होता था। अंग्रेजों की परंपरा आज भी कमोबेशी चल रही है। हमारे जैसे तुच्छ लोग अफसर के सामने की कुर्सी पर तभी बैठ सकते हैं जब उन्हें कहा जाए। अनदेखी पर लताड़ के लिए तैयार रहें।

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वैसे कुर्सी पर तौलिया की यह बीमारी एक संस्था में भी पहुँच गई थी। लेकिन जब एक कार्यक्रम अधिकारी ने एक आगंतुक को अपने जैसी तौलिया लगी कुर्सी की पेशकश करने के लिए बाजार से एक तौलिया खरीदी। जब तौलिया का बिल भुगतान के लिए लेखा विभाग में गया तो बवाला मच गया। संस्था के मुखिया ने तुरंत सभी कुर्सियों से तौलिया हटवा दीं।  

तौलिया का किस्सा घर-घर में होता है। पुराने वक्त में एक या दो तौलिए से पूरा कुनबा नहाकर बदन पोंछ लेता था। बाद में हर सदस्य के लिए अलग तौलिया होने लगी। इसके बाद हर सदस्य की नहाने की अलग, हाथ-मुँह पोंछने की अलग तौलिए आ गईं। अगर किसी ने किसी दूसरे की तौलिया, खास तौर पर ब्याह के लाई लड़की की तौलिया, का इस्तेमाल किसी ने कर लिया तो बस कयामत ही समझो।

फिल्मों और तौलिया का साथ भी अटूट है। कई फिल्मों में ‘टावेल डांस’ ने कई ऐक्टरों का करियर बनाया है और सेन्सर बोर्ड से उन्हें बचाया भी है क्योंकि बोर्ड तौलिया के पार नहीं देख पाया। वैसे पार देखने से बचने के लिए नेता और अफसर कार में गहरे काले के शीशों के बावजूद पर्दे भी लगवाते हैं। सब कुछ ढंका-मुंदा रहने दो… पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ।

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